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मासिक पत्रिका, August 2026 · पर्यावरण और आपदा प्रबंधन › आपदा वित्त और संस्थाएँ

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आपदाओं का वित्तपोषण: NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष), SDRF (राज्य आपदा मोचन निधि) और वित्त आयोग (Finance Commission) का सूत्र

मुख्य लेखप्रारंभिक और मुख्य1 Aug 2026

चर्चा में क्यों

  • 1 अगस्त 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री (Home Minister) ने मानसून की बाढ़ से प्रभावित राज्यों के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (State Disaster Response Fund) के केंद्र के हिस्से से ₹2,117.85 करोड़ की अग्रिम निर्मुक्ति को मंज़ूरी दी, और नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter Ministerial Central Teams) भेजे गए।
  • चार सप्ताह बाद 26 अगस्त की नेपाल बाढ़ गंडक के रास्ते बिहार में उतरी, और उसी महीने वृष्टि छाया क्षेत्र (rain shadow region) के राज्य सूखा ज्ञापन (memoranda) तैयार कर रहे थे।
  • इनमें से हर दावे का भुगतान ऐसी निधियों से होता है जिनका आकार और बँटवारा वित्त आयोग तय करता है, और 2026-27 सोलहवें वित्त आयोग (Sixteenth Finance Commission) के अधिनिर्णय (award) का पहला वर्ष है, जिसने सूत्र बदल दिया।
  • ₹2,83,807 करोड़2026 से 2031 तक आपदा मोचन और न्यूनीकरण के लिए सोलहवें वित्त आयोग का प्रावधान, जिसमें ₹2,04,401 करोड़ राज्यों के लिए और ₹79,406 करोड़ राष्ट्रीय निधियों के लिए हैं
  • 75:25 और 90:10राज्य निधियों में केंद्र और राज्य के हिस्से, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10
  • 80:20राज्य निधियों का मोचन और न्यूनीकरण के बीच बँटवारा
  • 30 और 70राज्य निधियों के आवंटन में नए Disaster Risk Index और किसी राज्य के पिछले आपदा व्यय के भार
  • लगभग 30 प्रतिशतपंद्रहवें आयोग के ₹68,463 करोड़ के राष्ट्रीय प्रावधान का वह हिस्सा जो जुलाई 2025 तक वास्तव में जारी हुआ

पृष्ठभूमि

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) तत्काल राहत के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (National Disaster Response Fund) और राज्य आपदा मोचन निधियाँ, तथा जोखिम घटाने वाली परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण निधि (National Disaster Mitigation Fund) और राज्य आपदा न्यूनीकरण निधियाँ (State Disaster Mitigation Funds) बनाता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) और मुख्यमंत्रियों की अध्यक्षता वाले राज्य प्राधिकरण इस व्यवस्था की निगरानी करते हैं; निधियों का प्रशासन केंद्रीय गृह मंत्रालय करता है।
  • वित्त आयोग, अनुच्छेद 280 के अधीन, राज्य निधियों के आकार, केंद्र और राज्यों के बीच उनके बँटवारे और राज्यों में उन्हें बाँटने वाले सूत्र की सिफ़ारिश करता है; पंद्रहवाँ आयोग (2021 से 2026) न्यूनीकरण निधियों का प्रावधान करने और 80:20 का बँटवारा तय करने वाला पहला आयोग था।
  • पंद्रहवें आयोग के सूत्र में चार संकट थे, चक्रवात, सूखा, भूकंप और बाढ़, और संवेदनशीलता (vulnerability) को गरीबी रेखा (poverty line) से नीचे की जनसंख्या के हिस्से से मापा गया था, जिसे क्षेत्रफल, जनसंख्या और पिछले व्यय के लिए समायोजित किया गया।
  • राहत का भुगतान राज्य अपनी निधि से गृह मंत्रालय द्वारा तय मानदंडों पर करता है; जिस राज्य की निधि किसी गंभीर प्रकृति की आपदा से समाप्त हो जाती है, वह केंद्रीय दल द्वारा नुकसान के आकलन के बाद राष्ट्रीय निधि की माँग करता है।
Paying for disasters: how the money flows Disaster Management Act, 2005 and the Sixteenth Finance Commission Finance Commission (Article 280) Recommends the size of the funds, the Centre to State sharing and the formula that divides the State funds among the States. State funds: SDRF and SDMF (Section 48) ₹2,04,401 crore for 2026 to 2031: response 80 per cent, mitigation 20. Centre 75 per cent; 90 per cent for North Eastern and Himalayan States; two instalments a year. Relief paid on central norms; an advance release in a bad monsoon (₹2,117.85 crore on 1 August 2026). National funds: NDRF and NDMF (Sections 46, 47) ₹79,406 crore for 2026 to 2031; ₹68,463 crore under the Fifteenth Commission. Released to a State for a calamity of severe nature after a central team assesses the damage. About 30 per cent of the Fifteenth Commission's provision was released by July 2025; the mitigation fund about 8 per cent. Who runs it National Disaster Management Authority, chaired by the Prime Minister; State Authorities by Chief Ministers. The Union Home Ministry administers the funds and fixes relief norms. Inter Ministerial Central Teams assess damage before a national fund release. The 2026 formula Sixteenth Commission reported 17 November 2025; accepted 1 February 2026; award 2026-27 to 2030-31. Allocation: 30 per cent Disaster Risk Index, 70 per cent past spending. First year ₹51,360 crore, rising 5 per cent a year.
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The Sixteenth Finance Commission's disaster formula How a State's share of the disaster funds is worked out, 2026-27 to 2030-31 State share = 30% × Disaster Risk Index + 70% × own disaster spending, 2011 to 2024 Spending net of transfers, inflation adjusted, with the pandemic years excluded. Disaster Risk Index = Hazard × Exposure × Vulnerability Hazard Ten hazards scored by quintile: flood, drought, cyclone, earthquake, landslide, hailstorm, cold wave, cloudburst, lightning, heatwave. The Fifteenth Commission used four Exposure Population projected for October 2026. More people in harm's way, higher index Vulnerability Per capita income, the 2018-19 to 2023-24 average, pandemic years excluded. Lower income counts as higher vulnerability; the Fifteenth Commission used the poverty headcount What the formula produces, 2026 to 2031 Eight States take 68.6 per cent of the State funds: Maharashtra, Uttar Pradesh, Bihar, Madhya Pradesh, Odisha, Rajasthan, Tamil Nadu and Gujarat. State funds up 27.6 per cent on the Fifteenth Commission; the North Eastern and Himalayan States up only 5.8 per cent, and six States get less than before.
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सोलहवें आयोग का सूत्र

  • आयोग ने 17 नवंबर 2025 को रिपोर्ट दी और सरकार ने 1 फ़रवरी 2026 को उसकी सिफ़ारिशें स्वीकार कीं; अधिनिर्णय 2026-27 से 2030-31 तक चलेगा।
  • किसी राज्य को आवंटन 30 प्रतिशत Disaster Risk Index से और 70 प्रतिशत 2011 से 2024 तक के उसके अपने आपदा व्यय से तय होता है, जिसमें महामारी के वर्ष और उसे मिले हस्तांतरण शामिल नहीं हैं।
  • सूचकांक संकट, जोखिम में जनसंख्या (exposure) और संवेदनशीलता को गुणा करता है: पंचमक (quintile) के आधार पर अंकित दस संकट (बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप, भूस्खलन, ओलावृष्टि, शीत लहर, बादल फटना, आकाशीय बिजली, लू); अक्टूबर 2026 के लिए अनुमानित जनसंख्या; और प्रति व्यक्ति आय, ताकि अधिक गरीब राज्य को अधिक संवेदनशील गिना जाए।
  • परिणाम: आठ राज्यों, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और गुजरात, को 68.6 प्रतिशत मिलता है। छह राज्यों को, जिनमें अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड शामिल हैं, पहले से कम मिलता है।
  • पहले वर्ष का प्रावधान ₹51,360 करोड़ है, जो प्रति वर्ष 5 प्रतिशत बढ़ेगा।

पैसा कहाँ जाता है, और कहाँ नहीं

  • राष्ट्रीय निधियों पर व्यय उनके प्रावधान से बहुत कम होता है: पंद्रहवें आयोग के ₹68,463 करोड़ में से जुलाई 2025 तक लगभग ₹20,759 करोड़ जारी हुए थे, और न्यूनीकरण निधि ने अपने प्रावधान का लगभग 8 प्रतिशत उपयोग किया था।
  • 1 अगस्त जैसी अग्रिम निर्मुक्तियाँ खराब मानसून में राज्य निधियों में नकदी बनाए रखने का केंद्र का तरीका हैं; अन्यथा दूसरी किस्त तभी जारी होती है जब पहली खर्च हो जाए और उसका हिसाब दे दिया जाए।
  • न्यूनीकरण का पैसा बिना खर्च पड़ा रहता है क्योंकि उसके लिए परियोजनाएँ, मूल्यांकन और राज्य का अंशदान चाहिए, जबकि राहत के पैसे के लिए केवल एक आपदा चाहिए।

विश्लेषण

  • बेहतर सूत्र, फिर भी पैसा गलत जगह। चार के बजाय दस संकट, गरीबी की गिनती के बजाय अनुमानित जनसंख्या से जोखिम और आय से संवेदनशीलता: यह सूचकांक इतिहास के बजाय जोखिम के लिए भुगतान करने का वास्तविक प्रयास है।
  • सत्तर प्रतिशत अब भी अतीत के पीछे चलता है। किसी राज्य का हिस्सा अधिकतर उसके पिछले व्यय का अनुसरण करता है, जो बार बार आपदा घोषित करने वाले राज्यों को पुरस्कृत करता है और रोकथाम में निवेश करने वालों को दंडित; हिमालयी राज्यों का हिस्सा, जहाँ नेपाल की आपदा संकट को सबसे तेज़ी से बढ़ता दिखाती है, सबसे कम बढ़ा।
  • 8 प्रतिशत खर्च करने वाली न्यूनीकरण निधि प्रतीक्षा में बैठी मोचन निधि है। पंद्रहवें आयोग का रिकॉर्ड दिखाता है कि तैयारी का पैसा बिना खर्च पड़ा रहता है जबकि राहत बाढ़ के बाद दी जाती है।
  • उलानबटार भी यही बदलाव माँगता है। इस महीने अपनाया गया सूखा नीति ढाँचा राहत से तैयारी की ओर उसी बदलाव का आह्वान करता है, जिसके वित्तपोषण के लिए ये निधियाँ बनी थीं।
  • आपदा वित्त को राजकोषीय संघवाद (fiscal federalism) के रूप में देखें। मुख्य परीक्षा का उत्तर इस पर टिका है कि आपदा किसे माना जाए यह कौन तय करता है, भुगतान कौन करता है, और पैसा बाढ़ से पहले पहुँचता है या बाद में।

आगे की राह

  • समय के साथ Disaster Risk Index का भार बढ़ाया जाए और पिछले व्यय का भार घटाया जाए, ताकि सूत्र दावों के बजाय जोखिम के लिए भुगतान करे।
  • राज्य प्राधिकरणों के माध्यम से न्यूनीकरण निधियों को परियोजनाओं की एक शृंखला दी जाए, और केंद्र का हिस्सा रोककर रखने के बजाय मूल्यांकित परियोजनाओं के बदले जारी किया जाए।
  • केंद्रीय दलों के आकलन और लागू मानदंड प्रकाशित किए जाएँ, ताकि राहत पूर्वानुमेय हो और राज्य जाने कि बाढ़ आने पर उसे क्या मिलेगा।
  • हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों को ऐसा संकट भार दिया जाए जो उन शृंखलाबद्ध बाढ़ों को दर्शाए जिनका वे अब सामना करते हैं।

परीक्षा दृष्टि

  • प्रारंभिक परीक्षा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अधीन NDRF और SDRF (धारा 46 और 48), न्यूनीकरण निधियाँ धारा 47 और 48 के अधीन; अनुच्छेद 280 के अधीन वित्त आयोग राज्य निधियाँ और उनका बँटवारा तय करता है; 75:25 और 90:10; मोचन और न्यूनीकरण में 80:20; सोलहवें आयोग का अधिनिर्णय 2026-27 से 2030-31 तक; Disaster Risk Index में दस संकट हैं और उसका भार 30 प्रतिशत है; NDMA की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
  • मुख्य परीक्षा: "भारत की आपदा निधियाँ घटना के बाद राहत के लिए भुगतान करती हैं और न्यूनीकरण को बिना खर्च छोड़ देती हैं।" इस संदर्भ में सोलहवें वित्त आयोग के सूत्र का परीक्षण कीजिए।

पहले पूछा गया: मुख्य परीक्षा 2020 GS3 · मुख्य परीक्षा 2024 GS3 · मुख्य परीक्षा 2026 GS3

प्रश्न देखें
  1. मुख्य परीक्षा 2020 GS3: Discuss the recent measures initiated in disaster management by the Government of India departing from the earlier reactive approach.
  2. मुख्य परीक्षा 2024 GS3: What is disaster resilience? How is it determined? Describe various elements of a resilience framework. Also mention the global targets of Sendai Framework for Disaster Risk Reduction (2015-2030).
  3. मुख्य परीक्षा 2026 GS3: “Community participation is the cornerstone of effective disaster management”. Analyse this statement with suitable examples from India. Also discuss the challenges to community participation and measures to strengthen it.

प्रमुख रिपोर्टें

  • सोलहवाँ वित्त आयोग, 2026-27 से 2030-31 के लिए रिपोर्ट (17 नवंबर 2025 को प्रस्तुत, 1 फ़रवरी 2026 को स्वीकृत): Disaster Risk Index और राज्यवार आवंटन।
  • पंद्रहवाँ वित्त आयोग, 2021-26 के लिए रिपोर्ट: पहली न्यूनीकरण निधियाँ और 80:20 का बँटवारा।

संबंधित लेख

स्रोत
  • News On AIR, 1 August 2026, “HM Amit Shah approves ₹2117.85 crore SDRF assistance for flood-hit States”
  • Rajiv Gandhi Institute for Contemporary Studies, “India's Public Finance for Disaster Management: Hits and Misses of the Sixteenth Finance Commission”

स्थापित तथ्य (अधिनियमों की तिथियाँ, संवैधानिक प्रावधान, स्थायी परिभाषाएँ) मानक संदर्भ ग्रंथों से हैं।

यहाँ दर्ज: आपदा वित्त और संस्थाएँ · मासिक पत्रिका, August 2026

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