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मासिक पत्रिका, August 2026 · अर्थव्यवस्था › व्यापार नीति, टैरिफ और व्यापार समझौते
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अमेरिकी टैरिफ और भारत का व्यापार: प्रवेश की नई कीमत के रूप में मानक
मुख्य लेखप्रारंभिक और मुख्यAugust 2026
चर्चा में क्यों
13 अगस्त 2026 को जारी व्यापार आँकड़ों में जुलाई के लिए भारत का वस्तु व्यापार घाटा छह महीने के उच्चतम स्तर पर दिखा, यद्यपि निर्यात लगभग पाँचवें भाग से बढ़ा। जुलाई सेक्शन 301 (Section 301) के तहत 24 जुलाई से भारत पर लगाए गए 10 प्रतिशत के नए अमेरिकी शुल्क का पहला महीना था।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राज्य अमेरिका वस्तुओं के लिए भारत का सबसे बड़ा बाज़ार है।
- भारत पर अमेरिकी टैरिफ अब अलग अलग कानूनों पर आधारित हैं: सेक्शन 301 (अन्य देशों की अनुचित प्रथाएँ), सेक्शन 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा; इस्पात, एल्युमिनियम और वाहन पुर्ज़े) और, कुछ समय के लिए, सेक्शन 122 (अधिकतम 150 दिनों का अस्थायी टैरिफ)।
- जुलाई में अमेरिकी व्यापार कार्यालय ने 60 व्यापार साझेदारों के निर्यात में बलात् श्रम (forced labour) की जाँच पूरी की, और 10 से 12.5 प्रतिशत के शुल्क लगाए।
- भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
भारत को कम दर क्यों मिली
- 13 जुलाई को भारत ने बलात् श्रम से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया।
- इसके बाद भारत को 10 प्रतिशत पर रखा गया, जबकि चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के लिए 12.5 प्रतिशत।
- सीख: किसी बाज़ार तक पहुँच अब केवल किसी देश के टैरिफ पर नहीं, बल्कि उसके श्रम और पर्यावरण नियमों पर भी निर्भर है।
निर्यात बढ़ने पर भी घाटा क्यों बढ़ा
- आयात कहीं बड़े आधार से बढ़ा, और महँगे कच्चे तेल और उर्वरक, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स के अधिक आयात ने बिल बढ़ाया।
- निर्यात में वृद्धि का एक भाग अधिक मात्रा से नहीं, बल्कि ऊँचे मूल्यों से आया।
- सेवाएँ सहारा हैं: सेवाओं के अधिशेष ने वस्तु घाटे के लगभग आधे भाग की भरपाई की।
टैरिफ की पहुँच कितनी है
- संयुक्त राज्य अमेरिका को भारत के लगभग 45 प्रतिशत निर्यात, जिनमें जेनेरिक दवाएँ और स्मार्टफ़ोन शामिल हैं, छूट प्राप्त हैं।
- जेनेरिक दवाओं पर खतरा बना हुआ है: 2028 के लिए शुल्क घोषित हैं, जब तक कि उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका में न चला जाए।
- प्रतिद्वंद्वी अधिक शुल्क देते हैं, इसलिए भारत की सापेक्ष स्थिति खराब नहीं हुई।
- कार्यकारी आदेश से लगाया गया टैरिफ फिर बढ़ाया जा सकता है; केवल हस्ताक्षरित समझौता ही निश्चितता देता है।
आगे की राह
- द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा किया जाए।
- यूनाइटेड किंगडम, ओमान और अन्य देशों के साथ नए समझौतों का उपयोग करते हुए बाज़ारों का विविधीकरण किया जाए।
- देश में श्रम, कार्बन और अनुरेखणीयता (traceability) के मानकों का पालन किया जाए, क्योंकि अधिक खरीदार इनकी माँग करेंगे।
- इलेक्ट्रॉनिक्स में घरेलू मूल्य संवर्धन को गहरा किया जाए।
प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य
- सेक्शन 301 और 122 अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 (Trade Act of 1974) में हैं; सेक्शन 232 व्यापार विस्तार अधिनियम, 1962 (Trade Expansion Act of 1962) में है।
- वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) विदेश व्यापार नीति अधिसूचित करता है।
- भारत का वस्तुओं में घाटा और सेवाओं में अधिशेष है।
- लागू विदेश व्यापार नीति 2023 की है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका वस्तुओं के लिए भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है।
स्रोत: The Hindu, 13 Aug 2026: Goods exports surged 20% in July 2026 on West Asia recovery and further diversification (opens in a new tab) · The Hindu, 24 Jul 2026: All you need to know about the 10% tariff on India over forced labour concerns (opens in a new tab) · The Hindu, 14 Jul 2026: India bans the import of goods made using forced labour (opens in a new tab) · The Hindu, 22 Jul 2026: Trump's 200% generic tariff threat would imperil Americans: Indian pharma (opens in a new tab) · PTI, 13 Aug 2026 · Reuters, 26 Jul 2026
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