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मासिक पत्रिका, July 2026 · राजव्यवस्था और शासन › केंद्र शासित प्रदेश, विशेष उपबंध और पाँचवीं तथा छठी अनुसूचियाँ
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लद्दाख: छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के स्थान पर अनुच्छेद 371 का मॉडल
मुख्य लेखप्रारंभिक और मुख्य3 Jul 2026
चर्चा में क्यों
- 3 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय और लद्दाख के दो नागरिक समाज (civil society) गठबंधनों, Leh Apex Body और Kargil Democratic Alliance, ने लेह में 22 मई की अपनी उच्चाधिकार प्राप्त समिति (High Powered Committee) की बैठक के सहमत कार्यवृत्त पर हस्ताक्षर किए।
- कार्यवृत्त में पूरे केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) के लिए एक निर्वाचित निकाय पर सहमति दर्ज है, जिसके पास कार्यकारी, विधायी और वित्तीय शक्तियाँ तथा नौकरशाही पर नियंत्रण होगा, और जिसे अनुच्छेद 371 के तहत एक विशेष रूप से तैयार किए गए उपबंध से संरक्षण मिलेगा, जबकि राज्य का दर्जा (statehood) दीर्घकालिक आकांक्षा के रूप में बना रहेगा।
- यह हस्ताक्षर मसौदे में बदलावों को लेकर लेह और कारगिल में जून भर चले विरोध प्रदर्शनों और बंद के बाद हुआ, और यह लद्दाख को एक ऐसे मार्ग पर रखता है जो न तो वह छठी अनुसूची है जिसकी उसने माँग की थी, और न ही वह विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश जो वह 2019 से है।

पृष्ठभूमि
- लद्दाख Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 के तहत 31 अक्टूबर 2019 को विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश बना। एक उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) इसका प्रशासन चलाते हैं, और राष्ट्रपति अनुच्छेद 240 के तहत इसके लिए विनियम बना सकते हैं।
- स्थानीय स्वशासन लेह (1995) और कारगिल (2003) की Ladakh Autonomous Hill Development Councils के माध्यम से चलता है; 13 जुलाई को प्रशासन ने कहा कि पहाड़ी परिषदों का विस्तार सभी सात ज़िलों तक किया जाएगा।
- Leh Apex Body और Kargil Democratic Alliance, जो बौद्ध बहुल लेह और मुस्लिम बहुल कारगिल का प्रतिनिधित्व करते हैं, 2020 से चार चीज़ों की माँग कर रहे हैं: राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल किया जाना, एक लोक सेवा आयोग, और लोक सभा की दो सीटें।
- लद्दाख के अधिकांश लोग अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) से हैं, और यही छठी अनुसूची की माँग का आधार है; राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes) ने 2019 में लद्दाख के लिए इस अनुसूची की सिफ़ारिश की थी।
छठी अनुसूची और अनुच्छेद 371 की तुलना
- छठी अनुसूची एक तैयार ढाँचा है: सूचीबद्ध विषयों पर विधायी, कार्यकारी और न्यायिक शक्तियों वाली निर्वाचित परिषदें, जिनके कानूनों के लिए राज्यपाल की अनुमति आवश्यक है। इसे किसी राज्य के भीतर के ज़िलों के लिए बनाया गया था, केंद्र द्वारा प्रशासित पूरे राज्यक्षेत्र के लिए नहीं।
- अनुच्छेद 371 और उसके अक्षर वाले रूप, 371A से 371J, विशेष राज्यों को उनके लिए लिखे गए सुरक्षा उपाय देते हैं। नागालैंड के लिए अनुच्छेद 371A और मिज़ोरम के लिए 371G यह रोक लगाते हैं कि धार्मिक या सामाजिक प्रथा, प्रथागत कानून, और भूमि के स्वामित्व तथा हस्तांतरण पर संसद का कोई अधिनियम तब तक लागू नहीं होगा जब तक राज्य विधान सभा ऐसा निर्णय न करे।
- अनुच्छेद 371 का कोई उपबंध हर मामले के लिए संविधान संशोधन द्वारा नए सिरे से तैयार किया जाता है, इसलिए उसकी मज़बूती उसके शब्दों पर निर्भर करती है; छठी अनुसूची की मज़बूती निश्चित है।
कार्यवृत्त क्या प्रावधान करता है
- केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर एक निर्वाचित निकाय, जिसके पास कार्यकारी, वित्तीय और विधायी शक्तियाँ हों।
- उसके विषयों को सँभालने वाली नौकरशाही पर निर्वाचित कार्यपालिका का नियंत्रण और पर्यवेक्षण, वह बिंदु जिस पर जून के विरोध प्रदर्शन केंद्रित थे।
- अनुच्छेद 371 के तहत निकाय के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपाय; राज्य का दर्जा दीर्घकालिक आकांक्षा के रूप में दर्ज, और निर्वाचित निकाय एक विशेष रूप से तैयार मॉडल की ओर पहले कदम के रूप में।
- मंत्रालय अंतिम मसौदा ढाँचा तैयार करेगा, दोनों गठबंधन अपना ढाँचा प्रस्तुत करेंगे, और कार्य संचालन नियमों का ब्योरा आगे की बैठकों में तय होगा।
छठी अनुसूची और अनुच्छेद 371 साथ साथ
| The Sixth Schedule | Article 371 (371 to 371J) | |
|---|---|---|
| Basis | Articles 244(2) and 275(1): autonomous district and regional councils in Assam, Meghalaya, Tripura and Mizoram | Special provisions written for particular States by constitutional amendment |
| What it gives | Elected councils with legislative, executive and judicial powers over land, forests, custom and inheritance; laws need the Governor's assent | 371A Nagaland and 371G Mizoram: Acts of Parliament on custom, land and religious practice apply only if the Assembly decides; 371F Sikkim; 371 Maharashtra and Gujarat development boards |
| Form | A fixed text, designed for districts within a State; never applied to a Union Territory | Drafted afresh each time: its strength is its wording |
| Ladakh today | Union Territory without a legislature since 31 October 2019; a Lieutenant Governor; regulations under Article 240; Hill Development Councils of Leh (1995) and Kargil (2003) | The minutes of 3 July 2026: an elected body for the whole territory with executive, legislative and financial powers, safeguards under a customised Article 371 provision, statehood the long term aspiration |
विश्लेषण
- एक समझौता जिसमें हर पक्ष अपनी पहली पसंद छोड़ता है। लद्दाख छठी अनुसूची चाहता था, जो संरक्षण को ऐसे पाठ में स्थिर कर देती है जिसे संसद आसानी से नहीं बदल सकती; केंद्र, जिसने कभी किसी केंद्र शासित प्रदेश को इस अनुसूची में नहीं रखा, ने अनुच्छेद 371 का एक उपबंध पेश किया जिसे वह स्वयं लिख सकता है।
- किसे क्या मिलता है। लद्दाख को एक निर्वाचित निकाय मिलता है, जो अनुसूची की ज़िला परिषदों से अधिक है; केंद्र चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा वाले इस राज्यक्षेत्र को अपने पास रखता है।
- खुले बिंदु ही वे हैं जो मायने रखते हैं। क्या निकाय के कानूनों के लिए केंद्र की अनुमति आवश्यक होगी, भूमि और नौकरियों को बाहरी लोगों से कैसे बचाया जाएगा, और जब प्रशासन के प्रमुख उपराज्यपाल हैं तब सिविल सेवकों पर निर्वाचित कार्यपालिका के नियंत्रण का क्या अर्थ है, वह विवाद जिसके साथ दिल्ली 1991 से जी रही है।
- एक औज़ार पेटी के रूप में असममित संघवाद (asymmetric federalism)। पाँचवीं और छठी अनुसूचियाँ, अनुच्छेद 371 और दिल्ली मॉडल, हर एक अलग प्रश्न का उत्तर देता है; लद्दाख को तीनों से लिया गया एक नया साधन दिया जा रहा है।
- मुख्य परीक्षा के लिए: छठी अनुसूची और अनुच्छेद 371 को साथ साथ रखिए, और मॉडल का आकलन इस आधार पर कीजिए कि उसके संरक्षण संविधान में लिखे गए हैं या किसी कार्यकारी व्यवस्था पर छोड़ दिए गए हैं।
आगे की राह
- मॉडल को संविधान में रखा जाए, क्योंकि कार्यकारी व्यवस्था वापस ली जा सकती है।
- भूमि, नौकरियों और संस्कृति को स्पष्ट शब्दों में संरक्षित किया जाए, जैसा कि अनुच्छेद 371A नागालैंड के लिए करता है, और एक अधिवास (domicile) नियम हो जिसका प्रशासन निर्वाचित निकाय करे।
- दिल्ली के अनुभव को ध्यान में रखते हुए, निर्वाचित कार्यपालिका और उपराज्यपाल के संबंध को संशोधन में ही तय किया जाए।
- एक समय सीमा के साथ राज्य के दर्जे को चर्चा में बनाए रखा जाए, और लेह तथा कारगिल, दोनों को शामिल किया जाए, जिनके हित अलग अलग हैं।
परीक्षा दृष्टि
- प्रारंभिक परीक्षा: अनुच्छेद 244(2) के तहत छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम पर लागू होती है; पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) अन्य राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) पर; अनुच्छेद 371A नागालैंड, 371G मिज़ोरम, 371F सिक्किम; लद्दाख में 2019 से कोई विधायिका नहीं है और उसका शासन अनुच्छेद 240 के विनियमों से चलता है; लेह (1995) और कारगिल (2003) की Hill Development Councils।
- मुख्य परीक्षा: "भारत में असममित संघवाद एक औज़ार पेटी है, कोई नियम नहीं।" 2026 के लद्दाख समझौते और छठी अनुसूची तथा अनुच्छेद 371 के बीच चयन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
पहले पूछा गया: प्रारंभिक परीक्षा 2015 · मुख्य परीक्षा 2025 GS2 · मुख्य परीक्षा 2026 GS3
प्रश्न देखें
- प्रारंभिक परीक्षा 2015: The provisions in Fifth Schedule and Sixth Schedule in the Constitution of India are made in order to
- मुख्य परीक्षा 2025 GS2: Discuss the nature of Jammu and Kashmir Legislative Assembly after the Jammu and Kashmir Reorganization Act, 2019. Briefly describe the powers and functions of the Assembly of the Union Territory of Jammu and Kashmir.
- मुख्य परीक्षा 2026 GS3: Ladakh is strategically located between China and Pakistan. As a measure to win hearts and minds of locals, discuss the Border Area Development Programmes (BADP) by the Central Government and civic actions by the Army. Also discuss demand of promulgation of provision of the Sixth Schedule of constitution for Ladakh.
उद्धृत करने योग्य मामले
- Samatha बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997): अनुसूचित क्षेत्र की भूमि गैर जनजातीय लोगों को हस्तांतरित नहीं की जा सकती, राज्य द्वारा भी नहीं।
- पु मिल्लई ह्लिछो बनाम मिज़ोरम राज्य (2005): छठी अनुसूची "संविधान के भीतर एक संविधान" है।
- दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार बनाम भारत संघ (2023): विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेश की निर्वाचित सरकार उन विषयों से जुड़ी सेवाओं पर नियंत्रण रखती है जिन पर वह कानून बनाती है।
- In Re संविधान का अनुच्छेद 370 (2023): अनुच्छेद 3 के तहत लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के गठन को बरकरार रखा।
संबंधित लेख
- लद्दाख: उच्च न्यायालय पीठ विनियम (राजव्यवस्था, अगस्त): समझौते के बाद अनुच्छेद 240 का पहला विनियम।
- केरल बना केरलम (राजव्यवस्था, अगस्त): अनुच्छेद 3 की वह शक्ति जिसके तहत लद्दाख बनाया गया।
- नागरिकता और सम्यक प्रक्रिया: Foreigners Tribunals पर निर्णय (राजव्यवस्था, जुलाई): वह दूसरा सीमावर्ती क्षेत्र जिसकी राजनीति इस प्रश्न पर टिकी है कि कौन यहाँ का है।
स्रोत
- The Statesman, 3 July 2026, “Centre, Ladakh groups seal deal on elected UT body, Article 371 safeguards”
- The Hindu, 1 July 2026
- The Hindu, 3 July 2026
- The Hindu, 13 July 2026
स्थापित तथ्य (अधिनियमों की तिथियाँ, संवैधानिक प्रावधान, स्थायी परिभाषाएँ) मानक संदर्भ ग्रंथों से हैं।
अपडेट, 27 Aug 2026: Ladakh: the High Court bench Regulation
यहाँ दर्ज: केंद्र शासित प्रदेश, विशेष उपबंध और पाँचवीं तथा छठी अनुसूचियाँ · मासिक पत्रिका, July 2026
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