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सामाजिक मुद्दे › महिलाओं और महिला संगठनों की भूमिका
English — अंग्रेज़ी में पढ़ेंआर्थिक भागीदारी
महिलाओं का काम, वेतन और मातृत्व अधिकार, और उस अंतर को मापने वाले सूचकांक।
पहले पूछा गया
- प्रारंभिक परीक्षा 2026: Which of the following statements with regard to the persons with disabilities in India is/are correct? 1. The Rights of Persons with Dis…
- प्रारंभिक परीक्षा 2026: Consider the following statements about the provisions pertaining to the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes in India: 1. Provision…
- प्रारंभिक परीक्षा 2026: Consider the following statements about Multidimensional Poverty Index (MPI): 1. MPI is calculated using Alkire-Foster methodology. 2. MP…
- प्रारंभिक परीक्षा 2024: Consider the following statements: 1. It is the Governor of the State who recognizes and declares any community of that State as a Schedu…
- मुख्य परीक्षा 2024 GS1: Distinguish between gender equality, gender equity and women's empowerment. Why is it important to take gender concerns into account in p…
- मुख्य परीक्षा 2023 GS1: Explain why suicide among young women is increasing in Indian society.
- प्रारंभिक परीक्षा 2022: In India, which one of the following compiles information on industrial disputes, closures, retrenchments and lay-offs in factories emplo…
- प्रारंभिक परीक्षा 2021: With reference to casual workers employed in India, consider the following statements: 1. All casual workers are entitled for Employees P…
सभी देखें: प्रारंभिक परीक्षा 1 · प्रारंभिक परीक्षा 2 · मुख्य परीक्षा
वेतन पर्ची से आगे मातृत्व अधिकार: न्यायालय, संहिता और गिग कार्यबल
Copy link to वेतन पर्ची से आगे मातृत्व अधिकार: न्यायालय, संहिता और गिग कार्यबलमानकप्रारंभिक और मुख्य30 Sep 2026
यह क्या है
- मातृत्व लाभ (maternity benefit) प्रसव के आसपास दिया जाने वाला सवेतन अवकाश और नौकरी का संरक्षण है। 2017 में संशोधित Maternity Benefit Act, 1961 ने भारत को विश्व के अपेक्षाकृत लंबे सवेतन अधिकारों में से एक दिया: पहले दो बच्चों के लिए 26 सप्ताह, तीसरे से 12 सप्ताह, दत्तक या कमीशनिंग माँ के लिए 12 सप्ताह, 50 या अधिक कर्मचारियों वाले हर प्रतिष्ठान में एक क्रेच (crèche), और अवकाश के दौरान बर्खास्तगी या सेवा शर्तों में किसी भी प्रतिकूल परिवर्तन पर रोक।
- 21 नवंबर 2025 को Code on Social Security, 2020 ने इस अधिनियम का स्थान लिया। संहिता के अध्याय VI में यही अधिकार हैं (धारा 60); संहिता दस या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होती है, और कोई महिला पिछले बारह महीनों में 80 दिन काम करने के बाद पात्र होती है।
क्या हुआ
- 31 अगस्त 2026 को राखी बिष्ट बनाम भारत संघ मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने कहा कि मातृत्व संरक्षण को "केवल महिला कर्मचारी के वेतन और पदनाम को बनाए रखने तक सीमित नहीं किया जा सकता।" अवकाश से लौटी एक प्रबंधक को ऐसे पद पर रखा गया था जिसमें न कर्मचारी थे न बैठकें; सार रूप में उसका पद घटा दिया गया था। न्यायालय ने ₹10 लाख का मुआवज़ा दिया, यह माना कि आवश्यकता के समय काम न कर रहा क्रेच वैधानिक दायित्व पूरा नहीं करता, और संघ को निर्देश दिया कि वह छह महीने के भीतर संहिता के तहत अवकाश के बाद भूमिका के संरक्षण, क्रेच के संचालन, शिकायत निवारण की समय सीमा और प्रतिशोध विरोधी सुरक्षा उपायों पर नियम या योजना बनाए।
- यह आदेश उन निर्णयों की शृंखला पर टिका है जिन्होंने इस अधिकार का विस्तार किया है: डॉ. कविता यादव बनाम Secretary, Ministry of Health and Family Welfare (उच्चतम न्यायालय (Supreme Court), 17 अगस्त 2023): संविदा कर्मचारी का लाभ पूरी अवधि तक चलता है, भले ही उसका अनुबंध बीच में समाप्त हो जाए; के. उमादेवी बनाम तमिलनाडु सरकार (उच्चतम न्यायालय, 23 मई 2025): किसी राज्य का दो संतान मानदंड (two child norm) तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं कर सकता, क्योंकि यह अवकाश अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन स्वायत्तता का अंग है; हम्सानंदिनी नंदुरी बनाम भारत संघ (उच्चतम न्यायालय, 17 मार्च 2026): संहिता की धारा 60(4), जो दत्तक माँ को अवकाश तभी देती थी जब बच्चा तीन महीने से कम का हो, अनुच्छेद 14 और 21 के तहत रद्द कर दी गई, क्योंकि भारत में गोद लेने में इतना समय लगता है कि यह सीमा अधिकार को केवल नाम का बना देती थी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
- कानून जो खुला छोड़ता है, उसे न्यायालय भर रहे हैं: कि यह अधिकार अनुबंध के बाद भी बना रहता है, किसी राज्य के परिवार के आकार संबंधी नियम के बावजूद बचा रहता है, गोद लिए बच्चे की आयु पर निर्भर नहीं करता, और अब उस नौकरी की विषयवस्तु तक पहुँचता है जिसमें महिला लौटती है। उच्चतम न्यायालय के 2025 और 2026 के निर्णय अनुच्छेद 21 पर आधारित हैं, जो मातृत्व को केवल श्रम कानून का अधिकार नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार बनाता है।
- कानून की पहुँच अधिक कठिन समस्या है। यह अधिकार दस या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान से जुड़ा है; भारत में अधिकांश कामकाजी महिलाएँ खेतों, घरों और छोटी इकाइयों में हैं जो इसके दायरे से बाहर हैं, और गिग कर्मकार का तो कोई नियोक्ता ही नहीं है। उनके लिए संहिता एक ऐसी योजना देती है जो अभी अधिसूचित होनी है, और एक नकद अंतरण, PMMVY (Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana), जो पहले बच्चे के लिए ₹5,000 है।
- पूरी तरह नियोक्ता द्वारा भुगतान किए जाने वाले लंबे अवकाश की एक लागत है, जिसकी ओर 2017 के संशोधन के समय से ध्यान दिलाया जाता रहा है: जिस नियोक्ता को 26 सप्ताह का भुगतान करना पड़े, वह प्रसव योग्य आयु की महिला को नियुक्त न करना पसंद कर सकता है। लंबे अवकाश वाले देश आमतौर पर इसका भुगतान सामाजिक बीमा से करते हैं। अनौपचारिक क्षेत्र के लिए भारत का उत्तर PMMVY है; औपचारिक क्षेत्र के लिए यह अब भी नियोक्ता का वेतन बिल है।
जानने योग्य योजनाएँ
Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY 2.0, अप्रैल 2022 से)
- पहले जीवित बच्चे के लिए दो किस्तों में ₹5,000 और दूसरा बच्चा लड़की होने पर एक किस्त में ₹6,000, आधार (Aadhaar) से जुड़े खाते में प्रत्यक्ष अंतरण द्वारा
- गर्भपात होने पर माँ फिर से पात्र हो सकती है।
- यह Mission Shakti का Samarthya घटक है, जो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अंब्रेला योजना है; इसका Sambal घटक One Stop Centres, 181 हेल्पलाइन और Nari Adalats चलाता है, और इसका Samarthya घटक Palna भी चलाता है, जो कामकाजी माताओं के छह महीने से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए राष्ट्रीय क्रेच योजना है, साथ ही Sakhi Niwas कामकाजी महिला छात्रावास, Shakti Sadan आश्रय गृह और Hub for Empowerment of Women भी।
e-Shram (26 अगस्त 2021)
- असंगठित कर्मकारों का श्रम और रोजगार मंत्रालय का रजिस्टर, जिसमें हर कर्मकार की 12 अंकों की आधार से जुड़ी संख्या है, और जो 15 कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ा है; इसके पंजीकरणों में 54 प्रतिशत महिलाएँ हैं।
- यही वह द्वार है जिससे गिग कर्मकार संहिता की किसी योजना में प्रवेश करेगा।
Code on Social Security, 2020, अध्याय IX
- गिग और प्लेटफॉर्म कर्मकारों के लिए एग्रीगेटर उपकर और Social Security Fund, जिनका वर्णन ऊपर किया गया है
- इसके तहत योजनाएँ केंद्र द्वारा बनाई जाएँगी और उपकर के साथ सरकारी निधियों और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (corporate social responsibility) की राशि का भी उपयोग कर सकती हैं।
परीक्षा दृष्टि
- प्रारंभिक परीक्षा: पहले दो बच्चों के लिए 26 सप्ताह, उसके बाद और गोद लेने पर 12 सप्ताह; 50 कर्मचारियों पर क्रेच; संहिता दस कर्मचारियों पर लागू; 80 दिन का काम पात्रता देता है; संहिता ने 21 नवंबर 2025 को अधिनियम का स्थान लिया; धारा 60(4) मार्च 2026 में रद्द; एग्रीगेटर उपकर कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत, सीमा कर्मकारों को भुगतान का 5 प्रतिशत; PMMVY ₹5,000 और ₹6,000।
- मुख्य परीक्षा: "Maternity Benefit Act जिन थोड़ी सी महिलाओं तक पहुँचता है उन्हें उदारता से संरक्षण देता है, और जिन अनेक तक नहीं पहुँचता उन्हें बिल्कुल नहीं।" हाल के निर्णयों और Code on Social Security के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
पहले पूछा गया: प्रारंभिक परीक्षा 2019 · मुख्य परीक्षा 2021 GS1
प्रश्न देखें
- प्रारंभिक परीक्षा 2019: Which of the following statements is/are correct regarding the Maternity Benefit (Amendment) Act, 2017? 1. Pregnant women are entitled for three months pre-delivery and three months post-delivery paid leave. 2. Enterprises with creches must allow the mother minimum six creche visits daily. 3. Women with two children get reduced entitlements. Select the correct answer using the code given below.
- मुख्य परीक्षा 2021 GS1: Examine the role of 'Gig Economy' in the process of empowerment of women in India.
उद्धृत करने योग्य मामले
- डॉ. कविता यादव बनाम Secretary, Ministry of Health and Family Welfare (2023): लाभ अनुबंध की अवधि से आगे भी मिलता है।
- के. उमादेवी बनाम तमिलनाडु सरकार (2025): मातृत्व अवकाश पर दो संतान की कोई सीमा नहीं; अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन स्वायत्तता।
- हम्सानंदिनी नंदुरी बनाम भारत संघ (2026): दत्तक माताओं का अवकाश बच्चे की आयु पर निर्भर नहीं हो सकता।
- राखी बिष्ट बनाम भारत संघ (दिल्ली उच्च न्यायालय, 2026): जिस पद पर वह लौटती है वह सार रूप में समतुल्य होना चाहिए; काम न करने वाला क्रेच, क्रेच है ही नहीं।
संबंधित लेख
- जनसंख्या नीति पर पुनर्विचार (सामाजिक मुद्दे, सितंबर): वह परिवार नीति जिसकी ओर प्रतिस्थापन स्तर (replacement level) से नीचे का देश मुड़ता है।
- Global Gender Gap Index 2026 (सामाजिक मुद्दे, सितंबर): आर्थिक भागीदारी पर भारत का 143वाँ स्थान हर मातृत्व मामले की पृष्ठभूमि है।
- Employees' Provident Fund (अर्थव्यवस्था, सितंबर): इस महीने की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी दूसरी ख़बर।
स्रोत
- ANI via NewKerala, 1 September 2026, “Maternity protection cannot be reduced to salary, designation”
- Khaitan & Co via Legal 500, 1 April 2026
- Sterling and Partners, 17 March 2026
- India Briefing, 18 March 2026
- LiveLaw, 17 August 2023
- CourtKutchehry, 27 January 2026
- PIB, 9 December 2025, “Labour Reforms: Formalising and Safeguarding India's Gig and Platform Workforce”
- PIB, 25 August 2026
- PIB, 6 March 2026, “Foundations of Women Empowerment”
Global Gender Gap Index 2026 और UN Gender Snapshot
Copy link to Global Gender Gap Index 2026 और UN Gender Snapshotसंक्षिप्तप्रारंभिक परीक्षा17 Sep 2026
- Global Gender Gap Index महिलाओं और पुरुषों के बीच के अंतर का World Economic Forum का वार्षिक माप है, जो चार उप सूचकांकों पर आधारित है: आर्थिक भागीदारी और अवसर, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य और उत्तरजीविता, तथा राजनीतिक सशक्तीकरण (political empowerment)।
- यह 0 से 100 प्रतिशत तक पाटे गए अंतर को अंक देता है, विकास के स्तर को नहीं, इसलिए कोई निर्धन देश किसी धनी देश से ऊपर स्थान पा सकता है।
- सितंबर में जारी 2026 की रिपोर्ट इसका बीसवाँ संस्करण है।
- अर्थव्यवस्थाओं में भारत 145 में से 131वें स्थान पर है, उसका 64.5 प्रतिशत अंतर पाटा जा चुका है। 2025 में स्थान 148 में से 131 था।
- जिस उप सूचकांक में बदलाव हुआ: आर्थिक भागीदारी और अवसर, जिसमें भारत 41.2 प्रतिशत के साथ 145 में से 143वें स्थान पर है, एक वर्ष में आधे अंक की वृद्धि; श्रम बल भागीदारी (labour force participation) में समानता 44.1 प्रतिशत है और अनुमानित अर्जित आय में समानता 35.1 प्रतिशत। इस उप सूचकांक पर भारत का सर्वश्रेष्ठ अंक 2013 में था।
- वैश्विक स्तर पर 69.2 प्रतिशत अंतर पाटा जा चुका है, और इस गति से समानता 120 वर्ष दूर है; आइसलैंड लगातार सत्रहवें वर्ष प्रथम है, उसके बाद फ़िनलैंड और नॉर्वे हैं; चौथे स्थान पर नामीबिया सर्वोच्च स्थान वाली अफ़्रीकी अर्थव्यवस्था है। राजनीतिक सशक्तीकरण विश्व भर में सबसे बड़ा अंतर है, जिसका 22.1 प्रतिशत पाटा गया है।
- UN Women और UN Department of Economic and Social Affairs द्वारा 17 सितंबर को General Assembly के उच्च स्तरीय सप्ताह से पहले जारी The Gender Snapshot 2026 संधारणीय विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को लैंगिक दृष्टि से पढ़ता है: वर्तमान दर पर राष्ट्रीय संसदों में समानता 63 वर्ष दूर है; विश्व के 175 मुख्य न्यायाधीशों में से 31 महिलाएँ हैं; सर्वेक्षण में शामिल हर तीन में से एक राष्ट्रीय लैंगिक समानता निकाय ने पिछले दो वर्षों में संस्थागत शक्ति में कमी की सूचना दी; लैंगिक समानता के लिए सहायता घट रही है। इसमें भारत का अलग से उल्लेख नहीं है।
परीक्षा दृष्टि: सूचकांक World Economic Forum का है; चार उप सूचकांक; 2026 में भारत 145 में से 131, आर्थिक भागीदारी पर 143; Snapshot, UN Women और UN DESA का है, एक SDG (संधारणीय विकास लक्ष्य) प्रगति रिपोर्ट, जो हर सितंबर जारी होती है।
स्रोत
- ANI via NewKerala, 16 September 2026
- PTI via The Week, 12 June 2025
- World Economic Forum
- IISD SDG Knowledge Hub, “When Women Lead, All SDGs Move Forward”
महिलाओं को किसान के रूप में मान्यता: महाराष्ट्र का अधिनियम
Copy link to महिलाओं को किसान के रूप में मान्यता: महाराष्ट्र का अधिनियममानकप्रारंभिक और मुख्य2 Jul 2026
यह क्या है
- भारत में ऋण, बीमा, आदान सब्सिडी और मुआवज़े के प्रयोजनों के लिए किसान व्यवहार में वह व्यक्ति है जिसका नाम भूमि अभिलेख पर है। संघ ने जुलाई 2026 में लोक सभा को जो Periodic Labour Force Survey के आँकड़े दिए, उनके अनुसार कृषि का लगभग 60 प्रतिशत काम महिलाएँ करती हैं, पर 2015-16 की कृषि गणना (Agriculture Census) के अनुसार उनके पास लगभग 12 से 13 प्रतिशत प्रचालनात्मक जोतें (operational holdings) हैं, और भूमि के 15 प्रतिशत से कम स्वामित्व पत्र।
- Swaminathan Commission की रिपोर्टों से निकली National Policy for Farmers, 2007 ने किसान को स्वामित्व से नहीं, बल्कि गतिविधि, यानी खेती और संबद्ध कार्य, से परिभाषित किया; यह परिभाषा कभी किसी कानून में नहीं आई। एम. एस. स्वामीनाथन का Women Farmers' Entitlements Bill, जो 2012 का एक गैर सरकारी सदस्य का विधेयक (private member's Bill) था, 2013 में व्यपगत हो गया।
- उत्तराखंड ने 2021 में अपने भूमि कानून में संशोधन करके पत्नी को पति की पैतृक भूमि का सह स्वामी बनाया; ऐसा करने वाला वह पहला राज्य था।
क्या हुआ
- महाराष्ट्र विधान सभा ने 2 जुलाई 2026 को Women Farmers Empowerment Bill सर्वसम्मति से पारित किया; इसे राज्यपाल (Governor) की अनुमति (assent) मिली और 22 जुलाई को यह Maharashtra Women Farmers Empowerment Act, 2026 के रूप में प्रकाशित हुआ।
- अधिनियम के अंतर्गत महिला किसान राज्य की वह 18 वर्ष या अधिक आयु की निवासी है जो अकेले या संयुक्त रूप से कृषि में लगी है, “भूमि की प्रकृति चाहे जो हो”: प्रचालनात्मक जोतधारक, लिखित या मौखिक पट्टे वाले काश्तकार, भूमिहीन खेतिहर, पशुपालक, खेतिहर मज़दूर, चरवाहे और मौसमी प्रवासी, सभी इसमें आते हैं। भूमि का स्वामित्व आवश्यक नहीं है।
- ग्राम सभा, या किसी कस्बे में नगर पंचायत, संकल्प द्वारा हर आवेदन पर निर्णय करती है, ऐसी महिला को भी मान्यता दे सकती है जिसने आवेदन नहीं किया, और अस्वीकृति के लिखित कारण देने होते हैं; प्रमाणपत्र 15 दिनों के भीतर जारी होता है और तब तक मान्य रहता है जब तक महिला खेती करती है; अपील तालुका कृषि अधिकारी के पास होती है।
- प्रमाणपत्र किसान के रूप में उसकी पहचान का निर्णायक प्रमाण (conclusive proof) है, उसे राज्य की योजनाओं के लाभों और राज्य की ऋण योजनाओं के अंतर्गत ऋण का हक़दार बनाता है, और उसे एक महिला किसान डेटाबेस (Women Farmers Database) में दर्ज करता है। अधिनियम एक State Fund for Women Farmers, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक परिषद और मुख्य सचिव के अधीन एक निगरानी समिति बनाता है। यह कोई अपराध और कोई दंड नहीं बनाता।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
- यह किसी भारतीय कानून में पहली बार किसान की पहचान को भूमि के स्वामित्व से अलग करता है, जो 2007 की नीति ने माँगा था और जिसे महाराष्ट्र का भूमि अभिलेख, 7/12 उतारा (7/12 extract), सदा नकारता रहा था।
- इसकी सीमा वही है जो विपक्ष ने सदन में बताई: प्रमाणपत्र राज्य की योजनाएँ खोलता है, संघ की नहीं, और स्वामित्व को नहीं छूता, इसलिए किसान के रूप में मान्य महिला अब भी उस भूमि को गिरवी नहीं रख सकती जिस पर वह खेती करती है; महिलाओं को पारिवारिक भूमि का सह स्वामी बनाने की माँग नहीं मानी गई।
- प्रमाणित करने वाली संस्था के रूप में ग्राम सभा अधिनियम का दाँव है, कि गाँव अपनी महिलाओं को मान्यता देगा; यही वह स्थान भी है जहाँ संकल्प से इनकार किया जा सकता है।
जानने योग्य योजनाएँ
Maharashtra Women Farmers Empowerment Act, 2026
- ग्राम सभा के संकल्प से प्रमाणपत्र, कोई भूमि कसौटी नहीं, State Fund, मुख्यमंत्री के अधीन परिषद, एक डेटाबेस; 22 जुलाई 2026 से लागू।
Mahila Kisan Sashaktikaran Pariyojana (2011, Deendayal Antyodaya Yojana National Rural Livelihoods Mission के अंतर्गत)
- स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिला किसानों के लिए संघ का कार्यक्रम, जो सतत कृषि, पशुधन और गैर काष्ठ वन उपज (non timber forest produce) को धन देता है।
उत्तराखंड का 2021 का संशोधन
- उसके ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार कानून में: पत्नियों के लिए पैतृक भूमि का सह स्वामित्व, जो अनुमानित 35 लाख महिलाओं तक पहुँचता है।
परीक्षा दृष्टि
- प्रारंभिक परीक्षा: Maharashtra Women Farmers Empowerment Act, 2026, अनुमति 22 जुलाई 2026, ग्राम सभा द्वारा प्रमाणपत्र, भूमि स्वामित्व की कोई कसौटी नहीं; कृषि कार्य में महिलाएँ लगभग 60 प्रतिशत और प्रचालनात्मक जोतों में 12 से 13 प्रतिशत (कृषि गणना 2015-16); National Policy for Farmers, 2007।
- मुख्य परीक्षा: क्या स्वामित्व के बिना मान्यता महिला किसान की ऋण, बीमा और मुआवज़े तक पहुँच को बदलती है, और महाराष्ट्र के मॉडल पर संघ के कानून के लिए क्या आवश्यक होगा।
संबंधित लेख
- महिलाओं को नकद हस्तांतरण: EAC-PM के साक्ष्य (सामाजिक मुद्दे, जुलाई): महिला की अपनी आय का दूसरा मार्ग।
- भारत में देखभाल अर्थव्यवस्था (सामाजिक मुद्दे, अगस्त): वह अवैतनिक काम जिसमें खेत और जोड़ देता है।
- वेतन पर्ची से आगे मातृत्व अधिकार (सामाजिक मुद्दे, सितंबर): वह महिला कामगार जिसे कानून नहीं देखता।
स्रोत
- PRS Legislative Research
- ThePrint, 2 July 2026, “Maharashtra Assembly passes first of its kind Bill to recognise women farmers”
- Down To Earth, 1 September 2026, “India's women farmers are finally being recognised; will they ever own the land?”
स्थापित तथ्य (अधिनियमों की तिथियाँ, संवैधानिक प्रावधान, स्थायी परिभाषाएँ) मानक संदर्भ ग्रंथों से हैं।
Women and Men in India 2025: आँकड़े क्या बताते हैं
Copy link to Women and Men in India 2025: आँकड़े क्या बताते हैंमानकप्रारंभिक और मुख्य30 Jun 2026
यह क्या है
- *Women and Men in India सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत National Statistics Office का लिंग के आधार पर विभाजित आँकड़ों का वार्षिक संकलन है। 2025 का खंड इसका 27वाँ संस्करण है
- यह अपना कोई सर्वेक्षण नहीं करता: यह जनगणना (census), नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System), Periodic Labour Force Survey, समय उपयोग सर्वेक्षण (Time Use Survey) और प्रशासनिक अभिलेखों के नवीनतम आँकड़ों को अध्याय दर अध्याय, जनसंख्या से लेकर निर्णय निर्माण तक, एक स्थान पर एकत्र करता है।
क्या हुआ
- मार्च 2026 की तिथि वाले 2025 के खंड की चर्चा अप्रैल 2026 के अंतिम दिनों में हुई; इसका श्रम अध्याय 27 मार्च 2026 को नए सर्वेक्षण डिज़ाइन पर जारी Periodic Labour Force Survey (PLFS) की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट पर आधारित है, इसलिए पिछले वर्षों से इसकी कड़ाई से तुलना नहीं की जा सकती।
- श्रम: 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए महिला श्रम बल भागीदारी (female labour force participation) दर 40 प्रतिशत थी, जबकि पुरुषों की 79.1 प्रतिशत; ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 2022 के 37.5 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत हो गई है, जबकि शहरी महिलाओं की लगभग 27.7 प्रतिशत पर बनी हुई है।
- आय: 2025 में नियमित वेतनभोगी महिलाओं ने औसतन ₹18,353 कमाए, जबकि पुरुषों ने ₹24,217, अर्थात नियमित नौकरी में एक महिला ने पुरुष की कमाई का लगभग तीन चौथाई कमाया।
- बेरोज़गारी: कुल मिलाकर महिलाओं और पुरुषों के लिए बराबर, 3.1 प्रतिशत, किंतु शहरी महिलाओं के लिए 6.4 प्रतिशत।
- जन्म के समय लिंगानुपात (sex ratio at birth): 2017-19 के 904 से बढ़कर 2021-23 में 917।
- शिक्षा: उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (gross enrolment ratio), 2022-23 में 30.2, अब पुरुषों के 28.9 से अधिक है; प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तक लैंगिक समानता सूचकांक (gender parity index) 1.0 है।
- निर्णय निर्माण: 2017 के बाद से प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है, लगभग 102 प्रतिशत की वृद्धि, जबकि पुरुषों के लिए 74 प्रतिशत।
| Indicator (latest year) | Women | Men |
|---|---|---|
| Labour force participation, aged 15 and above (PLFS 2025) | 40.0 per cent | 79.1 per cent |
| Worker population ratio, aged 15 and above (PLFS 2025) | 38.8 per cent | 76.6 per cent |
| Unemployment rate, aged 15 and above (PLFS 2025) | 3.1 per cent | 3.1 per cent |
| Share taking part in unpaid domestic work (Time Use Survey 2024) | 81.5 per cent | 27.1 per cent |
| Average earnings, regular salaried (PLFS 2025) | ₹18,353 | ₹24,217 |
| Minutes a day on unpaid domestic work, per participant (Time Use Survey 2024) | 289 | 88 |
| Minutes a day on unpaid care, per participant (Time Use Survey 2024) | 137 | 75 |
| Gross enrolment ratio, higher education (2022-23) | 30.2 | 28.9 |
यह क्यों महत्वपूर्ण है
- ग्रामीण वृद्धि इस दशक की कहानी है: 2017-18 के बाद से महिलाओं के काम में अधिकांश वृद्धि ग्रामीण महिलाओं से आई है, जिसका बड़ा भाग स्वरोज़गार (self employment) और पारिवारिक उद्यमों में अवैतनिक सहायता है, इसीलिए ऊँची भागीदारी ने आय का अंतर नहीं पाटा है।
- शहरी अंतर पहेली है: शिक्षित शहरी महिलाएँ शिक्षित पुरुषों की तुलना में कहीं कम काम करती हैं, और उनकी बेरोज़गारी दर किसी भी समूह में सबसे अधिक है, जो कौशल की किसी कमी के बजाय नौकरियों, सुरक्षित परिवहन और शिशु देखभाल के अभाव की ओर संकेत करता है।
- शेष को अवैतनिक काम स्पष्ट करता है: महिलाएँ अवैतनिक घरेलू काम पर प्रतिदिन पुरुषों से तीन गुने से अधिक मिनट बिताती हैं, और देखभाल पर लगभग दोगुने; जब तक यह समय बाँटा नहीं जाता या इसका भुगतान नहीं होता, भागीदारी एक स्तर पर ठहर जाएगी।
जानने योग्य योजनाएँ
Mission Shakti (2022, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय)
- महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण की योजनाओं की छत्र योजना, 1 अप्रैल 2022 से लागू, दो उप योजनाओं में: Sambal (सुरक्षा: One Stop Centres, Women Helpline, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao), Nari Adalats) और Samarthya (सशक्तीकरण)।
- Samarthya में Shakti Sadan, Sakhi Niwas कामकाजी महिला छात्रावास, Palna क्रेच योजना और Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana आते हैं।
Palna (2022, Samarthya के अंतर्गत)
- छह माह से छह वर्ष के बच्चों के लिए क्रेच, महीने में 26 दिन, प्रतिदिन 7.5 घंटे खुले; इसने 2022 में National Creche Scheme का स्थान लिया।
- मार्च 2025 तक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) में 11,395 आंगनवाड़ी सह क्रेच स्वीकृत।
- केंद्र और राज्यों द्वारा 60:40 के अनुपात में वित्तपोषित (पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों में 90:10)।
परीक्षा दृष्टि
- प्रारंभिक परीक्षा: National Statistics Office (MoSPI) द्वारा प्रकाशित Women and Men in India, 27वाँ संस्करण; PLFS 2025 में महिला श्रम बल भागीदारी 40 प्रतिशत (ग्रामीण 45.9, शहरी 27.7); जन्म के समय लिंगानुपात 917 (2021-23); उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन अनुपात 30.2, पुरुषों के 28.9 से अधिक।
- मुख्य परीक्षा: गाँवों में महिलाओं की भागीदारी क्यों बढ़ी है और शहरों में क्यों ठहर गई है, और इसे क्या बढ़ाएगा।
पहले पूछा गया: मुख्य परीक्षा 2024 GS1 · मुख्य परीक्षा 2025 GS2
प्रश्न देखें
- मुख्य परीक्षा 2024 GS1: Distinguish between gender equality, gender equity and women's empowerment. Why is it important to take gender concerns into account in programme design and implementation?
- मुख्य परीक्षा 2025 GS2: Women's social capital complements in advancing empowerment and gender equity. Explain.
संबंधित लेख
- भारत में देखभाल अर्थव्यवस्था (सामाजिक मुद्दे, अगस्त): भागीदारी के अंतर के पीछे के अवैतनिक घंटे।
- महिलाओं को नकद हस्तांतरण: EAC-PM (Economic Advisory Council to the Prime Minister) के साक्ष्य (सामाजिक मुद्दे, जुलाई): ऐसी आय जो नौकरी पर निर्भर नहीं है।
स्रोत
- Ministry of Statistics and Programme Implementation, March 2026, “Women and Men in India 2025”
- PolicyEdge, 29 April 2026
- Ministry of Statistics and Programme Implementation, 27 March 2026
- PIB, 25 February 2025
- Ministry of Women and Child Development, “Mission Shakti guidelines 2021-22 to 2025-26”
- PIB, April 2025

